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क्‍या होता है बादल फटना या Cloud Burst, कितनी खतरनाक हो सकती है ये घटना...छत्तीसगढ़ विहार

Cloud Burst

बुधवार को जम्‍मू कश्‍मीर के किश्‍तवाड़ में हाल के सालों में सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा आई. यहां पर गुलाबगढ़ इलाके में बादल फटने से कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है.



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 कुछ लोग लापता है तो कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात हैं. अधिकारियों की मानें तो लापता लोगों की संख्‍या 19 है तो 5 लोग ऐसे हैं जो गंभीर रूप से घायल हैं. नेशनल डिजास्‍टर रेस्‍पॉन्‍स फोर्स (एनडीआरएफ) को तुरंत दुर्घटनास्‍थल पर रवाना किया गया. बादल फटना जिसे अंग्रेजी में Cloud Burst कहते हैं, एक बड़ी प्राकृतिक आपदा मानी जाती है इस घटना में कुछ ही घंटों में कइ लोगों की मौत हो जाती है. क्‍या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि ये बादल क्‍यों फटते हैं? आइए आपको बताते हैं.


बहुत कम समय में हो जाती है बहुत तेज बारिश

बादल फटने की घटना में बहुत कम समय में अत्‍यधिक बारिश होती है. इस दौरान कभी-कभी ओले भी गिरते हैं और तूफान तक आ जाता है. आमतौर पर बादल फटने के कारण कुछ मिनट में इतनी तेजी बारिश होती है कि कुछ किलोमीटर के हिस्‍से में कुछ ही मिनटों में बाढ़ की स्थिति हो जाती है. इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि बादल फटने की घटना साधारण तौर पर धरती की सतह से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर होती है. अगर बारिश के दौरान करीब 100 मिलीमीटर प्रति घंटे की दर से बारिश होती है तो उस स्थिति को बादल फटना कहते है.


वैज्ञानिक नहीं मानते बादल फटने की घटना

सिर्फ कुछ मिनटों में ही 2 सेंटीमीटर से ज्‍यादा बारिश होती है. इससे प्रभावित क्षेत्र में भारी तबाही देखी जाती है. हालांकि वैज्ञानिक बादल फटने जैसी घटना को नहीं मानते हैं. वो नहीं मानते हैं कि बादल कभी किसी गुब्‍बारे के जैसा फटता हो, ऐसा कुछ नहीं होता. वो मानते हैं कि जिस समय कुछ मिनटों में बहुत तेज बारिश होती है, उसे ही लोग बादल फटने की घटना कहते हैं. मौसम विज्ञान की मानें तो जब बादलों में भारी मात्रा में आर्द्रता होती है. उनकी स्थिति में जब कोई बाधा आती है तो संघनन (condensate) बहुत तेज हो जाता है. इस स्थिति में प्रभावित और सीमित इलाके में कई लाख लीटर पानी एक साथ धरती पर गिरता है. इसके कारण उस क्षेत्र में तेज बहाव या बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है.


केदारनाथ में भी फटा था बादल

पानी के तेज बहाव की वजह से भी संरचनाओं और चीजों को भारी नुकसान होता है. भारत के लिहाज से समझें तो मानसून के मौसम में नमी से भरपूर बादल जब उत्तर की तरफ बढ़ते हैं तो हिमालय पर्वत एक बड़ी बाधा के रूप में उनके रास्ते में होता है. नमी से भरपूर बादलों के साथ जब कोई गर्म हवा का झोंका टकराता है, तब भी बादल फटने जैसी घटना हो सकती है.


साल 2005 में मुंबई में बारिश के अलावा, 18 जुलाई 2009 को पाकिस्तान के कराची में बादल फटने से भारी तबाही हुई थी. उस समय सिर्फ दो घंटे में 250 मिमी बारिश दर्ज हुई थी. 6 अगस्त 2010 को लद्दाख के शहर लेह में एक के बाद एक कई बादल फटे थे, इसकी वजह से लगभग पूरा पुराना शहर तबाह हो गया था. इस घटना में 115 लोगों की मौत हुई थी जबकि 300 से ज़्यादा लोगों के घायल होने की खबरें थीं. इसके बाद साल 2013 में केदारनाथ में 16 और 17 जून को बादल फटा था जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई थी.


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